Wednesday, August 24, 2011

Why We Need So Many Annas & Jan Lokpals

शौचालय में अनाथालय...। रहम करके ये मत पूछना कि ये फोटो कहां की है.
बदलाव के लिए हमें अन्ना और बिल, दोनों की जरूरत है. वैसे बात केवल राजनीतिक भ्रष्टाचार की ही नहीं है, बात सामाजिक और मानसिक भ्रष्टाचार की भी है, जिसके लिए ना जाने देश को कितने अन्ना, गांधी और राजा राममोहन रायों की जरूरत है.

65वें स्वतंत्रता दिवस की शाम

पतंगबाजी का मजा किरकिरा कर देने वाली 65वें स्वतंत्रता दिवस की शाम ये अचरज भरा नजारा दिखा. ध्यान से देखिए, इंद्रधनुष के थोड़ी ऊपर एक और इंद्रधनुष है. आजादी की इस शाम के बाद आई सुबह अन्ना हजारे की थी.

Sunday, January 30, 2011

भारत में जल विवाद



हाल में कृष्णा नदी के जल बंटवारे का निपटारा हुआ। लेकिन इस तरह के विवाद और भी कई राज्यों के बीच चल रहे हैं। जानते हैं इनके बारे में..

कुछ दिनों पहले कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण ने कृष्णा नदी के जल बंटवारे पर अंतिम फैसला सुनाया। फैसले के मुताबिक, आंध्र प्रदेश को सबसे ज्यादा १००१ मिलियन घन फीट (टीएमसी) पानी मिलेगा। कर्नाटक को ९११ और महाराष्ट्र को ६६६ टीएमसी पानी मिलेगा। दरअसल यह नदी इन तीनों राज्यों से होकर निकलती है। महराष्ट्र के महाबलेश्वर से निकलने और राज्य में ३०३ किलोमीटर, उत्तरी कर्नाटक से ४८० और सबसे अधिक आंध प्रदेश से १३०० किलोमीटर बहती है। नदी के इस स्वरूप और दिशा के कारण यह तीनों राज्यों में जल के बटवांरे को लेकर विवाद का विषय बनी हुई थी। विवाद सुलझाने के लिए भारत सरकार ने इनर स्टेट वाटर डिसप्यूट एक्ट (१९५६) के तहत १९६९ में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आर.एस.बचावत के नेतृत्व में कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण गठित किया। हाल ही जो रिपोर्ट आई, वह द्वितीय कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा पेश की गई, जिसका गठन सितंबर २००३ में किया गया था।

कावेरी जल विवाद
कावेरी नदी के जल के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक में काफी दिनों से विवाद है। इस विवाद की शुरुआत १८९२ व १९२४ में मद्रास प्रेजीडेंसी और प्रिंसली स्टेट ऑफ मैसूर के बीच हुए समझौतों से हुई। लेकिन वर्तमान कर्नाटक इस समझौते से बेहद असंतुष्ट है और समझौतों को मद्रास प्रेजीडेंसी के हक में मानता है। कर्नाटक चाहता है कि पुराने समझौते की शर्तों बदली जाएं और पानी का बराबर बंटवारा हो। लेकिन वहीं तमिलनाडु का कहना है कि उसने ३० लाख एकड़ जमीन विकसित कर चुका है। राज्य के लाखों किसानों की जीविका उसी जल पर निर्भर है। झगड़े को निपटाने के लिए भारत सरकार ने १९९० में एक ट्रिब्यूनल गठित किया, जिसने ५ फरवरी, २००७ को अपना फैसला सुनाया। तय हुआ कि सालाना १२ किमीश् पानी तमिलनाडु को, ७.६ किमीश् कर्नाटक को, ०.८ किमीश् केरल और ०.२ किमीश् पांडुचेरी को मिलेगा।

सतलुज-यमुना नहर विवाद
सतलुज यमुना लिंक कनाल के निर्माण का उद्देश्य हरियाणा को रावी व्यास नदी के पानी का उसका हिस्सा मुहैया कराना है। इस नहर से भारत के पूर्वी तट से पश्चिम तट का दूरी कम हो जाएगा, जिसका सीधा फायदा व्यापार में मिलेगा। नहर दिल्ली के समीप स्थित पल्ला गांव के करीब शुरू हुई। इससे सिंधु बेसिन का ३.५ मिलियन एकड़ फीट हिस्सा हरियाणा को स्थानांतरित किया जाना था। हालांकि हरियाणा ने अपना हिस्सा पूरा कर दिया है, लेकिन पंजाब इस निर्माण के खिलाफ है। पंजाब विधानसभा में पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट २००४ पास कर समझौते को खारिज कर दिया है। ऐसे में पंजाब में नहर का निर्माण न हो पाने के चलते विवाद बरकरार है।

वंसधारा जल विवाद
उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के बीच बहने वाली इस नदी को लेकर विवाद की वजह आंध्र का उस पर बांध बनाना है। इस वजह से कटरागढ़ पर बाढ़ से प्रभावित रहने लगा। इससे आसपास का जलस्तर कम होने लगा। इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है। इसी तरह गोवा और कर्नाटक के बीच मांडवी/महादयी को लेकर विवाद है। पंजाब और हरियाणा के बीच भी रावी-व्यास को लेकर काफी पुराना जल विवाद है।

Sunday, October 31, 2010

टैलेंट + हॉबी = कामयाबी

स्कूल खासतौर पर कॉलेज लेवल पर बहुत सी एक्टिविटीज होती हैं, जो भविष्य में न सिर्फ नौकरी और व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं, बल्कि कैरियर विजन तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

कॉलेज व स्कूल लाइफ में पढ़ाई के अलावा कई एक्टिविटीज होती हैं, जैसे एनसीसी, एनएसएस, स्काउट, स्पोट्र्स, कल्चरल प्रोग्राम्स वगैरह वगैरह। इनमें से कुछ आपको आत्मनिर्भर और अनुशासित बनाने के साथ सरकारी नौकरियां भी दिलाती हैं, तो कुछ यह जानने में मदद करती है कि आपकी मानसिक बनावट कैसी है और किस क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं। आपका आगे का रास्ता आसान हो जाए, इसलिए यहां जानते हैं इन एक्टिविटीज और इनसे मिलने वाले फायदों के बारे में।

एनसीसी
डिफेंस फील्ड में भविष्य बनाने के सपने को हकीकत में बदलने की शुरुआत आप एनसीसी (नेशनल कैडेट कोर) से कर सकते हैं। स्कूल स्तर पर एनसीसी (जेडी) ज्वाइन कर ए सर्टिफिकेट और कॉलेज में एनसीसी (एसडी) ज्वाइन कर बी और सी सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। तीन साल की ट्रेनिंग के बाद ही सी सर्टिफिकेट मिलेगा। एनसीसी डीजी ऑफिस से कर्नल आर. एस. छेत्री ने बताया कि एनसीसी में रेगुलर मोड से पढ़ाई करने वाले छात्र ही आ सकते हैं। एनसीसी टे्रनिंग न सिर्फ युवाओं में लीडरशिप, डिसिजन मेकिंग, कमांड ऐंड कंट्रोल, एकता व अनुशासन जैसी स्किल्स विकसित करती है, बल्कि इसके बी और सी सर्टिफिकेट के जरिए डिफेंस फोर्सेज में नौकरी भी मिलती है। हर साल आईएमए, देहरादून में एनसीसी से ६४ कैडेट्स का चयन किया जाता है। नेवी (६ पद) और एयरफोर्स (१० प्रतिशत) में भी इनके लिए कुछ पद आरक्षित रहते हैं। साल में दो बार एनसीसी स्पेशल एंट्री स्कीम भी निकलती है, जिसके जरिए बिना यूपीएससी की सीडीएस लिखित परीक्षा दिए सीधे ओटीए (चेन्नई) एसएसबी इंटरव्यू के लिए जा सकते हैं। यहां लड़कियों के लिए २० प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन एनसीसी स्पेशल एंट्री के लिए ग्रेजुएशन में ५० प्रतिशत अंक होने चाहिए। यही नहीं, आजकल रिलायंस, सहारा, ताज, रेडिसन जैसे कई बड़े-बड़े प्राइवेट ग्रुप भी एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर्स और फ्रैश ग्रेजुएट्स को सिक्योरिटी डिपार्टमेंट में नौकरी दे रही हैं। एयलाइंस व एयरपोर्ट पर भी इन्हें काम मिल रहा है। १० से १२ हजार रुपये से यहां शुरुआत होती है। पैरा मिलिट्री फोर्सेज और पुलिस में इन्हें प्राथमिकता मिलती है। कई विश्वविद्यालयों में एनसीसी कोटे से पीजी स्तर पर दाखिला मिलता है। ज्यादा जानकारी के लिए द्धह्लह्लश्च://ठ्ठष्ष्द्बठ्ठस्रद्बड्ड.ठ्ठद्बष्.द्बठ्ठ/ देखें।

खेल-कूद
खेल-कूद में हिस्सा लेने न सिर्फ आपको यूनिवर्सिटी में दाखिले में छूट मिलेगी बल्कि स्पोट्र्स कोटे से सरकारी नौकरी पाने का भी अवसर है। आज अमूमन हर यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में स्पोट्र्स कोटे से दाखिला होता है। इलाहाबाद यूनि. के फिजिकल एजुकेशन के विभागाध्यक्ष व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिनेश चंद्र लाल ने बताया कि नेशनल/ऑल इंडिया, स्टेट या यूनिवर्सिटी लेवल पर खेलने वाले स्पोट्समैन को डिफेंस फोर्सेज, पुलिस में नौकरी में प्राथमिकता मिलती है। रेलवे जैसे कई सरकारी विभागों में स्पोट्र्स कोटे से विशेष भर्तियां निकलती हैं। जूनियर या सब-जूनियर लेवल पर गोल्ड मेडल विजेता इलाहाबाद जैसे कई विश्वविद्यालयो में सीधे बीपीएड में प्रवेश ले सकते हैं। स्टूडेंट वेलफेयर ऑफिसर के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन और ऑल इंडिया इंटरवर्सिटी लेवल स्पोट्र्स सर्टिफिकेट चाहिए। स्पोट्र्स ऑफिसर भी बन सकते हैं। बीपीएड के बाद एम.फिल या पीएचडी कर टीचिंग का विकल्प भी है। इन दिनों प्राइïवेट फम्र्स भी स्पोट्समैन को जॉब्स दे रही हैं। जिम्स में सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर को ही रखा जा रहा है। ऐसे में स्पोट्समैन के लिए फिटनेस ट्रेनर, स्पा थेरेपिस्ट और फिटनेस फॉर लैंसर के तौर काम किया जा सकता है।

एनएसएस
युवा एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एनएसएस यानी नेशनल सर्विस स्कीम, का लक्ष्य सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के व्यक्तित्व का विकास और उन्हें जागरुक बनाना है। ११वी-१२वीं और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र इसका हिस्सा बन सकते हैं। एनएसएस के उप-कार्यक्रम सलाहकार सतीश कुमार साहनी ने बताया कि एसएस सर्टिफिकेट होल्डर्स को हायर स्टडीज में प्राथमिकता मिलती है। जामिया और गुरु नानक देव जैसी देश की विभिन्न यूनिवर्सिटीज में इनके लिए दो से पांच प्रतिशित सीटें आरक्षित रखी जाती है। स्कीम द्वारा समय-समय पर आयोजित रक्तदान शिविर, राष्ट्रीय एकता शिविर, टीकाकरण और पौधारोपण अभियान जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं। युथ एक्सचेंज प्रोग्राम्स होते हैं, जिसमें वोलियंटर्स को न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी जाने का मौका मिलता है। एड्स और डिसास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम्स का हिस्सा बनकर काफी अच्छा अनुभव मिलता है। हालांकि इसका जॉब में तो फायदा नहीं है, लेकिन इसके अनुभव से आपका व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और ज्ञान में जो वृद्धि होगी, वह जीवन के हर मोड़ पर काम आएगा।

भारत स्काउट्स ऐंड गाइड्स
भारत स्काउट्स ऐंड गाइड्स स्कूल और कई स्थानों पर कॉलेज स्तर पर पढ़ाई कर रहे युवाओं को टे्रनिंग देता है। भारत स्काउंट्स ऐंड गाइड्स के डायरेक्टर बिनोद कुमार बहुगुणा ने बताया कि यहां ट्रेंड युवाओं के लिए भारतीय रेलवे में ग्रुप सी और डी में अलग से जॉब निकलती हैं। रेलवे में स्काउट्स ऐंड गाइड्स कोटे (प्रेजीडेंट स्काउट/गाइड/रेंजर/रोवर या हिमालयन वुड बैच होल्डर या एचडब्लूबी ट्रेंड स्काउट लीडर) से संबंधित भर्तियां निकलती रहती हैं। नेशनल लेवल या स्टेर लेवल की इवेंट में भी पार्टिसिपेशन होना चाहिए। भारत स्काउट्स ऐंड गाइड्स सरकारी संस्था नहीं, बल्कि एक एनजीओ है, जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, अनुशासित और बेहतर नागरिक बनाता है। स्काउट प्रशिक्षण शिविरों में टीम वर्क से चुनौतीपूर्ण टास्क पूरे करने का अनुभव उन्हें जीवनभर मदद करता है। बहुगुणा ने बताया कि ऐसे विद्यार्थी जो रेगुलर माध्यम से पढ़ाई नहीं कर रहे हैं, ओपन यूनिट में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट द्धह्लह्लश्च://222.ड्ढह्यद्दद्बठ्ठस्रद्बड्ड.शह्म्द्द/ देख सकते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम
केवल स्पोट्र्स कोटे ही नहीं, बल्कि कल्चरल कोटे से भी अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिला मिलता है। ऐसे में अगर आप स्कूल स्तर पर डांस या ड्रामा जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय हैं, तो कम नंबर होने के बावजूद भी आपके पास अच्छे कॉलेज का ऑप्शन रहता है। डीयू के किरोड़ीमल कॉलेज की कल्चरल सोसाइटी के कन्वेनर सोम्यजीत भट्टाचार्य का कहना है कि फिल्म, थियेटर और म्युजिक सोसाइटी में हिस्सा लेने से छात्रों केलिए इस क्षेत्र से संबंधित प्रतिष्ठित संस्थान जैसे एनएसडी, एफटीआईआई, सत्यजीत रे फिल्म संस्थान और भारतेंदु नाट्य अकादमी में दाखिला लेना आसान हो जाता है। इसके अलावा नृत्य, नाटक, गायन, वाद-विवाद, पेंटिंग आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने से कैरियर विजन तैयार करने में मदद मिलती है। इससे आपको अंदाजा लगेगा कि आपकी मानसिक बनावट कैसी है और किस क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं।

स्टूडेंट्स यूनियन
देश की राजनीति में भविष्य तलाश रहे हैं, तो स्टूडेंट यूनियन से कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं। जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष संदीप सिंह का मानना है कि राजनीति में जाने के लिए स्टूडेंट्स यूनियन एक सशक्त प्लेटफॉर्म तैयार करती है। छात्र राजनीति छात्रों में लोकतंत्र और राजनीति की एक बेहतर समझ विकसित करती है। आज देश में ऐसे कई बड़े नेता हैं, जिन्होंने छात्र संघ से ही शुरुआत की और पहचान बनाई।

Monday, September 6, 2010

परमाणु दायित्व विधेयक-२०१०

हाल में भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में परमाणु दायित्व विधेयक कई संशोधनों के बाद पारित हुआ। पिछले कई समय से सांसद में इस मुद्दे पर भारी हंगामा चल रहा था। जानते हैं इस विधेयक और इससे जुड़े विवादों के बारे में।

क्या है ये विधेयक
दरअसल इसके लागू होने के बाद ऐसा कानून बनेगा, जिससे कि असैन्य परमाणु संयंत्र में दुर्घटना होने की स्थिति में संयंत्र के संचालक (ऑपरेटर) की जिम्मेदारी तय की जा सके। इसी कानून से दुर्घटना प्रभावित लोगों को मुआवजा मिल सकेगा। अमरीका और भारत के बीच अक्टूबर २००८ में असैन्य परमाणु समझौता हुआ था। अमरीका और अन्य परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों से भारत को तकनीक और परमाणु सामग्री की आपूर्ति तब शुरु हो सकेगी, जब वह परमाणु दायित्व विधेयक के जरिए एक कानून बना लेगा।

विवादित धारा १७
धारा १७ (बी) दुर्घटना में आपूर्तिकर्ता के दायित्व से जुड़ी है। यह विवाद परमाणु आपूर्तिकर्ताओं को परिवहन के दौरान या इसके बाद होने वाली दुर्घटनाओं को लिए जवाबदेह ठहराने को लेकर था। विधेयक में आपूर्तिकर्ताओं को जवाबदेह नहीं ठहराया गया था, लेकिन अब संशोधित मसौदे के मुताबिक परमाणु संयंत्र का संचालक आपूर्तिकर्ता से मुआवजा तब मांग सकेगा, जब- (ए) उसके ऐसे अधिकार का उल्लेख सौदे में लिखित रूप से हो, (बी) परमाणु दुर्घटना घटिया या खराब उपकरणों की आपूर्ति की वजह से हुई हो, (सी) परमाणु दुर्घटना किसी व्यक्ति या फर्म की मंशा या चूक के कारण हुई हो।
इस धारा की शब्दावली को लेकर भी विवाद उठा था। धारा १७ के उपबंध (अ) और (ब) के बीच 'औरÓ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद पैदा हुआ। विरोध के बाद सरकार ने 'औरÓ शब्द को निकाल दिया था, लेकिन '(इन्टेन्ट) इरादेÓ शब्द को शामिल कर दिया। विपक्ष ने इस शब्द का यह कहकर विरोध किया कि परमाणु हादसे के संबंध में इरादा शब्द के जिक्र से आपूर्तिकर्ता को उसकी जिम्मेदार से बच निकलने का रास्ता मिल सकता है, क्योंकि इस तरह की किसी दुर्घटना में इरादा साबित करना मुश्किल होगा। अब संशोधन के तहत यह धारा १७ बी से यह शब्द भी हटा लिया गया है। यहां ऑपरेटर या संचालक न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया होगी। जबकि अमेरिका की जीई और वेस्टिंगहाउस तथा फ्रांस की अरेवा जैसी कंपनियां आपूर्तिकर्ता होंगी।

अन्य विवाद
इस विधेयक में मुआवजे की राशि को लेकर भी विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी। पहले इसके लिए विधेयक में संचालक को अधिकतम ५०० करोड़ रुपयों का मुआवजा देने का प्रावधान था, लेकिन विपक्ष की आपत्ति के बाद सरकार ने इसे तीन गुना करके १५०० करोड़ रुपए करने को मंजूरी दे दी। मुआवजे के लिए दावा करने की समय सीमा को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच काफी मतभेद थे। अब सरकार ने दावा करने की समय सीमा को १० वर्षों से बढ़ाकर २० वर्ष करने का निर्णय लिया है। असैन्य परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों का प्रवेश भी विवादित विषय रहा। सीएससी भी एक विवादित विषय रहा। सीएससी (कन्वेंशन फॉर सप्लीमेंटरी कंपेनसेशन) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिस पर हस्ताक्षर करने का मतलब होगा, कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में दावाकर्ता सिर्फ अपने देश में मुआवजे का मुकदमा कर सकेगा। यानी दावाकर्ता को किसी अन्य देश की अदालत में जाने का अधिकार नहीं होगा।

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ब्लैकबेरी और विवाद

ब्लैकबेरी
ब्लैक ब्लैकबेरी एक पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (पीडीए) हैंडसेट के तौर पर काम करता है, जिसमें इंटरनेट, ईमेल, मेसेजिंग, एड्रेस बुक, और कैलेण्डर जैसी तमाम एडवांस सेवाएं हैं। अन्य फोनों से यह सिक्योरिटी के मामले में अलग है। इसके द्वारा भेजे गए ई-मेल या मैसेजेस बीच में पढ़े नहीं जा सकते क्योंकि उन्हें इनक्रिप्ट कर दिया जाता है। कनाडा की एक कंपनी रिम (क्रढ्ढरू- क्रद्गह्यद्गड्डह्म्ष्द्ध ढ्ढठ्ठ रूशह्लद्बशठ्ठ) वर्ष १९९६ से यह बनाती आ रही है। अमेरिकी से शुरुआत कर अब इस स्मार्टफोन की पहुंच १७५ देशों तक हो गई है। मुख्यरूप से इसमें मेसेजिंग से संबंधित काफी फंक्शन्स हैं, इसलिए यह मेसेजिंग फोन ज्यादा है। ब्लैकबेरी उपयोगकर्ता को एक निजी पिन नंबर दिया जाता है। सभी ब्लैकबेरी हैंडसेट ब्लैकबेरी इंटरप्राइज सर्वर (बीईएस) से जुड़े होते हैं। भारत में तकरीबन १० लाख लोग इसकी सेवाएं प्रयोग करते हैं। हाल में डाटा इनक्रिप्शन को लेकर भारत सरकार और रिम के बीच काफी विवाद हुआ।

क्या है डाटा इनक्रिप्शन
डाटा को एनकोड करने की प्रक्रिया को डाटा इनक्रिप्शन कहते हैं। ऐसा डाटा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है, ताकि अनधिकृत व्यक्ति डाटा पढ़ न सके। ई-कॉमर्स और ई-गर्वनेंस से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस स्तर से अधिक की इनक्रिप्शन की जरूरत होती है। वर्तमान में मोबाइल फोन या इंटरनेट से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल अधिक होने के कारण डाटा इनक्रिप्शन का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में आजकल मेसिजिंग या ईमेल का अधिकांश डाटा अनरीडेबल (जिसे पढ़ा न सके) फॉर्म में भेजा जाता है, जिसे सॉफ्टवेयर से समझा जाता है जिनमें विशेष प्रकार की 'इनक्रिप्शन-कीÓ होती है। ४० बिट की इनक्रिप्शन कम स्तर की होती है जिसे तोडऩा या कै्रक करना आसान होता है।

कैसे काम करता है
ब्लैकबेरी यूजर्स के मेलबॉक्स में एक प्राइवेट 'इनक्रिप्शन-कीÓ होती है। यह प्राइवेट-की फोन में आए या भेजे जाने वाले डाटा को इनक्रिप्ट कर देती है। इनक्रिप्टेड सूचना सुरक्षित तरीके से स्मार्टफोन में पहुंचती है जहां पहले से स्टोर 'कीÓ से इसे डीक्रिप्डेट कर देती है।

विवाद
ब्लैकबेरी की इनक्रिप्शन उच्च स्तर की है जिसके कारण एंटरप्राइज ईमेल (कंपनियों से संबंधित ईमेल) और मेसेंजर सर्विसेज पर खुफिया एजेंसिया निगरानी नहीं रख पाती। भारत सरकार का कहना है कि इससे आतंकवादी को मदद मिलेगी। इसलिए उसने रिम को चेतावनी दी है कि ई-मेल और मेसेज को कोड भाषा में भेजना बंद किया जाए। साथ ही इनक्रिप्टेड डाटा को डीक्रिप्ट करने की 'मास्टर-कीÓ भी साझा करें। सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोई कंपनी अथॉरिटी (लाइसेंस देने वाली) की अनुमति के बगैर ४० बिट तक की इनक्रिप्शन लेंथ का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन अगर इन्क्रिप्शन की लंबाई ज्यादा है तो इसके लिए कंपनी को अथॉरिटी से लिखित तौर पर अनुमति लेनी होगी। साथ ही अथॉरिटी को 'डिक्रिप्शन-कीÓ भी देनी होगी। रिम की दलील है कि इस फोन का निर्माण ही इस तरह से किया गया है कि कंपनी भी इसके डाटा को इंटरसेप्ट नहीं कर सकती। उनका कहना है यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। लेकिन सरकार ने इसको ३१ अगस्त का समय दिया है।

अन्य देशों में ब्लैकबेरी
यूएई और साउदी अरब ने ब्लैकबेरी की उन सर्विसेज पर रोक लगाने की चेतावनी दी है जिन्हें इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता। सऊदी अरब में बैन लगने के डर से रिम अपनी मेसेंजर सर्विस की निगरानी के लिए राजी हो गई है। कुवैत और लेबनान में भी रिम को इनक्रिप्टिड सूचनाओं के एस्सेस यानी उनकी निगरानी के लिए कहा है। चीन के दबाव के आगे रिम ने वहां निगरानी के वास्ते अपना अलग सर्वर लगा दिया है। अल्जीरिया और बहरीन में भी इस पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लग सकता है।

Saturday, August 14, 2010

पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क

आप अकसर पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क का नाम सुनते रहते हैं। इन शब्दों के स्पष्ट अर्थ को लेकर बहुत से लोग असमंजस में रहते हैं। दरअसल ये तीनों बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट) के तहत आते हैं। यहां जानते हैं इनके बारे में।
पेटेंट
पेटेंट ïïïïïïवह व्यवस्था है जिसके तहत किसी भी नई खोज से बनने वाले उत्पाद पर एकाधिकार दिया जाता है। यह अधिकार खोज करने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा दिया जाता है। इसके बाद एक निश्चित समय तक न तो कोई उस उत्पाद को बना सकता है और न ही बेच सकता है। अगर बनाना चाहे, तो उसे लाइसेंस लेना पड़ेगा और रॉयल्टी देनी होगी। विश्व व्यापार संगठन ने पेटेंट की अवधि बीस साल तय कर रखी है। पेटेंट हासिल करने वाला व्यक्ति अपना यह अधिकार बेच या ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा प्रोसेस पेटेंट भी होता है, जिसका संबंध नई तकनीक या किसी उत्पाद को बनाने वाली विधि से है। मतलब किसी नई विधि पर भी पेटेंट लिया जा सकता है। लेकिन पेटेंट का ये आदेश जिस देश में जारी किया जाता है, उसकी सीमाओं के भीतर ही उसे लागू माना जाता है। मगर, टीआरआईपीएस, पेंटेंट सहयोग संधि (पीसीटी) और सब्सटेंसिव पेंटेंट लॉ ट्रीटी जैसे कई बहुपक्षीय समझौतों के विस्तार के साथ पेंटेंट व्यवस्था वैश्विक रूप लेती जा रही है।
कॉपीराइट
यह भी बौद्धिक संपदा अधिकार का ही एक रूप है, लेकिन कई मायनों में पेटेंट से अलग है। कॉपीराइट किसी मौलिक लेखन, संगीत, कलाकृति, डिजाइन, फिल्म या तस्वीरों के लिए होता है। भारतवर्ष में कॉपीराइट को लेकर कॉपीराइट एक्ट - १९५७ है। यह अधिकार किसी को हस्तांतरित किया जा सकता है। जैसे किसी फिल्म के रीमेक का अधिकार प्राप्त करना होता है या किसी और की धुन या गीत का इस्तेमाल करना होता है, तो उसके लिए भी अनुमति की जरूरत होती है। कॉपीराइट एक निश्चित समय के लिए मान्य होता है जिसके बाद उस कृति को सार्वजनिक मान लिया जाता है। किसी व्यक्ति की कृति को 'नैतिक अधिकारÓ के तौर पर कुछ कानूनी मान्यता भी हासिल है। मसलन किसी व्यक्ति की कृति का इस्तेमाल करने पर उसे इसके लिए श्रेय दिया जाना चाहिए। हाल ही में फिल्म 'थ्री इडियटÓ को चेतन भगत की किताब पर आधारित माना जा रहा था और जिसके लिए फिल्म में कोई श्रेय नहीं दिया गया था। लिहाजा चेतन भगत और फिल्म निर्माता के बीच कुछ अनबन देखने को मिली थी।
ट्रेडमार्क
ट्रेडमार्क भी एक तरीके से बौद्धिक संपदा अधिकार होता है जिसका इस्तेमाल कोई कंपनी या उत्पादक अपने उत्पाद को दूसरों से अलग बताने के लिए करता है। किसी वस्तु पर मौजूद ट्रेडमार्क से जाहिर होता है कि यह किसी विशेष कंपनी की ओर से बनाया जा रहा है। ट्रेडमार्क का प्रयोग कोई व्यक्ति, व्यावसायिक संगठन या कानूनी इकाई अपने उत्पाद या सेवा के लिए करती है। आमतौर पर किसी नाम, वाक्य, लोगो, विशेष चिह्नï, डिजाइन या चित्र को ट्रेडमार्क बनाया जाता है। कंपनी विशेष के सभी उत्पादों पर उसका ट्रेडमार्क लगा होता है। कानूनी संस्था आईएसआई मार्क, आईएसओ मार्क, खाद्य उत्पादों में शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों की पहचान के लिए हरे और लाल निशान (ट्रेडमार्क) का इस्तेमाल करती है। ट्रेडमार्क पंजीकृत और गैर-पंजीकृत दोनों तरह के होते हैं।